विधालय संचालकों व शिक्षा विभाग में अधिकारियों की मिली भगत से विभाग में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर   बच्चों, अध्यापक, अध्यापिकाओं व कर्मचारियों का हो रहा है शोषण ?


मोदी नगर 4 फरवरी (चमकता युग)  उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनपद  गाजियाबाद में  केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दिल्ली से सम्बद्धता प्रदान किये जाने में राज्य सरकार को निम्नलिखित प्रतिबन्धों एवं शर्तों के अधीन आपत्ति नहीं होती है । उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से शिक्षा विभाग से जारी शासनादेश के नियमानुसार इन केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद दिल्ली से सम्बंद्धता वाले विधालयों की प्रबन्ध समिति में उत्तर प्रदेश के शिक्षा निदेशक द्वारा नामित सदस्य होगा । विधालय में कम से कम 10 प्रतिशत स्थान मेधावी और पिछड़े एवं निर्बल आय वर्ग के बच्चों के सुरक्षित रहेंगे तथा उनसे उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद/ बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विधालयों में विभिन्न कक्षाओं के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क नहीं लिया जायेगा । विधालय के संचालक, शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिलकर शासनादेश की धज्जियां उड़ा रहे हैं । जिला प्रशासन भी इस भ्रष्टाचार को नहीं रोक पा रहा है ? विधालय में अध्यन कर बच्चों के अभिभावकों को नियमों की जानकारी न होने कारण विधालय संचालक एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी पूरा फायदा उठा रहे हैं और भ्रष्टाचार के इस गन्दे तालाब में गोते खूब लगा रहे हैं ?
इतना ही नहीं विधालय के सभी अध्यापक व अध्यापिकाएं प्रशिक्षित होंगे । विधालय के शिक्षण तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को राजकीय सहायता प्राप्त शिक्षण विधालयों के कर्मचारियों को अनुन्य वेतनमानों तथा अन्य भत्तो से कम वेतन मान एवं अन्य भत्ते नहीं दिये जायेंगे । इन विधालयों में अध्यापक ,अध्यापिकाओं व कर्मचारियों का शोषण होता है, क्योंकि उन्हें मानकों के अनुरूप वेतन अन्य सुविधा नहीं मिलती है । यहाँ तक की विधालय में अनुशासन तथा शिक्षा का स्तर उच्च कोटि का होना चाहिए , इन विधालयों में अध्यन कर रहे बच्चों के लिए सुरक्षा की दृष्टि से अग्नि शमन उपकरण भी आपको पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलेंगे और न ही अग्नि शमन विभाग से जारी अन्तिम अनापत्ति प्रमाण पत्र विधालय सचंलको के पास मिलेगा । अधिकांश विधालयों में भवन निर्माण का संबंधित विभाग से मानचित्र स्वीकृत नहीं मिलेगा, यदि मानचित्र मिल भी गया तो विधालय भवन निर्माण मानचित्र के अनुरूप नहीं मिलेगा । यहाँ तक की संबंधित विभाग से विधालय भवन निर्माण का सम्पूर्ण प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया होगा, जबकि बिना सम्पूर्ण प्रमाण पत्र प्राप्त किए भवन का उपयोग नहीं किया जा सकता है ।
उत्तर प्रदेश शासन से जारी उक्त शर्तों का पालन करना अनिवार्य है । किसी भी समय उक्त शर्तों में से किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त अनापत्ति प्रमाण पत्र वापिस लेने का प्रावधान है ।
परंतु शिक्षा विभाग के भ्रष्ट अधिकारी अपने निजी स्वार्थ में उक्त शर्तों का पालन नहीं कराते हैं । यदि अधिकारी विधालयों में उक्त शर्तों का पालन कराना शुरू करवा दें तो बच्चों के अभिभावकों को काफी राहत मिलेगी साथ ही विधालय संचालक उत्तर प्रदेश शासन से जारी शासनादेश का पालन नहीं करते हैं तो उनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र वापिस लेकर विधालय को बन्द करा दिया जाये इसके साथ ही प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शिक्षा विधालयों में बच्चों के अध्यन हेतु मान्यता कहाँ प्राप्त की है कि भी निष्पक्ष जांच हो जाये तो दुध का दुध पानी पानी हो जाएगा ।
सुरेश शर्मा, संपादक, चमकता युग ,मोदी नगर ,गाजियाबाद


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